_चूड़ियां सुहागन महिलाओं की पहचान मानी जाती हैं और महिलाओं को नए-नए डिजाइनों की चूड़ियां पहनने का शोक होता है, लेकिन महिलाओं द्वारा बाजारों में जाकर नामहरम (जिन से खून का रिश्ता न हो) मर्दों से चूड़ियां पहनने को दारुल उलूम देवबंद नाजायज करार दिया है।_ _ताजा फतवे में दारुल उलूम देवबंद ने कहा है कि ऐसा करना सख्त गुनाह है।_
_देवबंद के ही मोहल्ला बड़जियाउलहक निवासी एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग से लिखित सवाल में पूछा था। कि हमारे यहां आमतौर पर चूड़ियां बेचने व पहनाने का काम मनीहार बिरादरी से संबंध रखने वाले लोग करते हैं। औरतों को चूड़ियां पहनने के लिए घर से निकलना पड़ता है और अपने हाथ गैर मर्दों के हाथों मे देने पड़ते हैं। क्या इस तरह घर से निकलकर या घर में रहकर औरतों का गैर मर्दों से चूड़ी पहनना जायज है। इस पर दारुल उलूम देवबंद के मुफ्तियों की खंडपीठ ने जवाब देते हुए कहा है कि नामहरम मर्द का अजनबी औरतों को चूड़ी पहनाना नाजायज और गुनाह है।_
_औरतों का नामहरम मर्दों से चूड़ी पहनने के लिए बाहर निकलना भी मना है। और गैर मर्दों से चूड़ियां पहनना नाजायज व सख्त गुनाह है। ऐसे गुनाह से बचना और तौबा करना वाजिब है। तंजीम अब्नाए दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती यादे इलाही कासमी ने दारुल उलूम द्वारा जारी फतवे को पूरी तरह सही बताते हुए कहा है कि इस्लाम ने औरतों को गैर मर्दों से पर्दा करने का हुक्म दिया है। इसलिए मुसलमान औरतों को चाहिए कि या तो वे चूड़ियां किसी औरत के हाथ से पहने या फिर अपने हाथों से चूड़ियां पहनने की आदत डालें।_
_दारुल उलूम देवबंद के फतवे पर मुफ्ती तारिक कासमी ने कहा कि कुरान और हदीस की रौशनी में दारूल उलूम ने फतवा दिया है। इस्लाम में किसी अजनबी औरत को अजनबी मर्द के सामने बेपर्दा होना या एक दूसरे को छूना गलत है चूड़ियों के मामले में औरतें अजनबी मर्दों की दुकानों पर चूड़ियां खरीदने जाती हैं। उनको हाथों में चूड़ियां पहनने के लिए अपने हाथ को गैर मर्द के हाथों में देना पड़ता है, जिस वजह से उनके हाथों पर गैर मर्द के हाथ लगते हैं। यह गलत है इससे मुस्लिम महिलाओं को बचना चाहिए। इस्लाम में यह नाजायज है। इस्लाम चूड़ियां पहनने से मना नहीं करता औरतें चूड़ियां खरीदकर अपने घर आकर खुद पहने या किसी महिला से पहने। मुस्लिम महिलाओं को शरीयत का ध्यान रखना चाहिए।_
Tuesday, February 13, 2018
दारूल उलूम का फतवा गैर मर्द से चूड़ी पहनना नाज़ायज़
Monday, February 12, 2018
किस डे। प्यार का अहसास
आज किस डे है। ऐसा दिन जिसके बारे में सुनकर ही शायद प्रेमियों की धड़कने बढ़ जाएं। किस भी एक तरह का लव एक्सप्रेशन है। वैसे तो किस करने के लिए किसी डे की जरूरत नहीं है लेकिन इस डे प्रथा के जमाने में जब हर एहसास और हर रिश्ते के नाम एक दिन कर दिया गया है तो भला किस को क्यों एक्सेप्शन बनाया जाए। हर प्रेमी-प्रेमिका अपने साथी को किस करना चाहते हैं और लगभग हर बार उन्हें अपने साथी को किस करने के लिए थोड़ी-बहुत हिचकिचाहट और कुछ ना-नुकुर का सामना करना पड़ता है। यदि प्रेमी-प्रेमिका पहली बार एक-दूसरे का किस कर रहे हों तो दोनों का हड़बड़ाना स्वाभाविक है। वे तय नहीं कर पाते कि बातों ही बातों में कैसे किस लिया जाए। पहली बार अपने साथी को किस करना सचमुच ही चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अक्सर पहली बार किस करते समय अपने साथी के रिएक्शन के बारे में कुछ पता नहीं होता। अक्सर हम फिल्मों में किस दृश्य देखते हैं लेकिन उनके तरीके के सही होने में संदेह है। यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि आप पहली बार किस कर रहे हैं या कई बार कर चुके हैं। यहां पर महत्वपूर्ण यह है कि क्या आप दिलकश किस कर पाते हैं जो आपके दिल की धड़कन को बढ़ा दे और आपके साथी को आपके बारे में दिन-रात सोचने पर मजबूर कर दे। पहला किस आपके रोमांस संबंध की नींव होता है इसे प्रभावी और यादगार बनाने के लिए आज किस डे पर बेफिक्र होकर अपनी प्रेमिका को अपने आगोश में लेकर किस कर सकते हैं। जब प्रेमी मुलाकात खत्म करके अपने-अपने गंतव्य की ओर जा रहे हों तो किस करने का बेहतरीन समय होता है इसे गुडबाय किस कहते हैं। पहली बार किस करने का इससे बेहतर बहाना दूसरा और कोई नहीं हो सकता। यदि आप पहला किस पहली मुलाकात में ही कर रहे हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आपने अपने साथी के साथ मुलाकात का भरपूर मजा लिया। यदि आपने दो-तीन मुलाकातों के बाद भी अपने साथी को किस नहीं किया है तो वह सोचेगा कि आप उसमें बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। किस करने में अमूमन प्रेमिकाएं पहल नहीं करतीं लेकिन वे अपने हाव-भाव से किस करने का निमंत्रण जरूर देती हैं जिसे प्रेमी को समझना आवश्यक है। जैसे यदि प्रेमिका कुछ अधिक आई कॉन्टेक्ट बनाए सटकर बैठे और बार-बार अकारण ही आपको छू ले तो समझ लीजिए कि वह किस चाहती है। किस आपके साथी के प्रति आपके व्यवहार और भावनाओं का प्रतीक होता है इसलिए पहला किस जितना सौम्य हो उतना ही आपके संबंधों में निखार आएगा। पहले किस के दौरान ड्राई किस किया जाए तो बेहतर होगा इसके अलावा बंद मुंह से बिना जीभ टच किए किस करने से यह मैसेज जाता है कि आप अपने साथी की बहुत परवाह करते हैं। पहला किस सिर्फ कुछ क्षणों का होना चाहिए वैसे इसका कोई निश्चित समय तय नहीं है। जब आपके होंठ आपके साथी के होंठ को स्पर्श कर जाएं तो कुछ सेकंड बाद आहिस्ता अपने होंठ अलग कर लें। किस के दौरान यदि आपको यह अहसास हो कि सामान्य से अधिक समय बीत चुका है और अब भी आप का साथी किस को जारी रखे हुए है तो आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अगर आपने अब तक भी अपने प्यार को पहला किस नहीं किया है तो अब भी समय है कि आप उनको रूमानी किस कर उनको अपना बना लें। सुनहरा मौका है।
रउफ अहमद सिद्दीकी नोएडा
नज़रिया
अमेरिका मे जब एक कैदी को फॉसी की सजा सुनाई गई तो वहॉ के कुछ बैज्ञानिकों ने सोचा कि क्यों न इस कैदी पर कुछ प्रयोग किया जाय ! तब कैदी को बताया गया कि हम तुम्हें फॉसी देकर नहीं परन्तु जहरीला कोबरा सॉप डसाकर मारेगें !
और उसके सामने बड़ा सा जहरीला सॉप ले आने के बाद कैदी की ऑखे बंद करके कुर्सी से बॉधा गया और उसको सॉप नहीं बल्कि दो सेफ्टी पिन्स चुभाई गई !
और क्या हुआ कैदी की कुछ सेकेन्ड मे ही मौत हो गई, पोस्टमार्डम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर मे सॉप के जहर के समान ही जहर है ।
अब ये जहर कहॉ से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली ......वो जहर उसके खुद शरीर ने ही सदमे मे उत्पन्न किया था । हमारे हर संकल्प से पाजिटीव एवं निगेटीव एनर्जी उत्पन्न होती है और वो हमारे शरीर मे उस अनुसार hormones उत्पन्न करती है ।
75% वीमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोंच से उत्पन्न ऊर्जा ही है ।
आज इंसान ही अपनी गलत सोंच से भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है ......
अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें और खुश रहें
25 साल की उम्र तक हमें परवाह नहीँ होती कि "लोग क्या सोचेंगे ? ?
50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते हैं कि " लोग क्या सोचेंगे ! !
50 साल के बाद पता चलता है कि
हमारे बारे में कोई सोच ही नहीँ रहा था ! !
Tuesday, February 6, 2018
मां बाप से बुरा सुलूक ख़ुदा की ना
शादी की पहली रात थी दूल्हा खाने का बड़ा सा थाल हाथ में लिय़े कमरे में दाखिल हूआ खाने से बहुत उम्दा खुशबू आ रही थी कहने लगा आओ खाना खाते हे
बीवी बोली मेने देखा तुमहारी अम्मी ने भी खाना नही खाया हे उनको भी बुला लो फ़िर मिलकर खाते हे
शौहर कहने लगा वह सो गई होगी छोड़ो हम दोनो खाते हे बीवी क़े कई बार इसरार क़े बाद भी शौहर अम्मी को बुलाने नही गया
जब उसने शौहर का ये रवेय्या देखा तो तलाक का मुतालबा कर दिया तो वह हेरान हो गया ओर तलाक हो गया
दोनो अलग अलग हो गये ओर दोनो ने दूसरी शादिया करली 30 साल गुजर गये उस औरत क़े तीन बेटे हुये बहुत मुहब्बत करने वाले बहुत आसुदा हाल थी वह
उसने तीनो बेटों क़े साथ हज करने का इरादा किया तो सफर क़े दौरान बेटे माँ क़े साथ इस तरह पेश आ रहे थे जसे कोइ मलका हो
रास्ते में एक आदमी पर नज़र पड़ी बहुत बुरी हालत में भूखा प्यासा पुराने कपड़े निढाल बेठा था किसी क़े जरिये वह भी हज क़े मुक़द्दस सफर पर भेजा गया था
औरत ने अपने बेटोँ से उसे उठाकर हाथ मुँह धुलाकर खाना खिलाने को कहा वह पेहचान गई थी ये उस्का पहला शौहर हे (था)
वह कहने लगी ये वक़्त ने तुम्हारे साथ क्या किया जवाब मिला' मेरे बच्चो ने मेरे साथ भलाई नही की' औरत कहने लगी वह क्यु करती भलाई तुमने भी तो अपने वालिदैन क़े साथ बुरा सुलूक किया था में उस दिन जान गई थी की तुम माँ बाप क़े हुकूक अदा नही करते इसलिए में डर गई थी कल को मेरे साथ भी ऐसा ही होगा
देखो आज में कहाँ हूँ ओर तुम कहाँ हो.
माँ बाप क़े साथ बुरा सुलूक अल्लाह की नाफ़रमानी हे, जिस किस्म का बुढापा हम गुजारना चाहते हे वेसा ही माँ बाप का बुढापा गुजरने में मदद करनी चाहिये क्यूँकि ये ऐसा अमल हे जिसका बदला दुनिया में ही दे दिया जाता हे ख्वाह अच्छा हो या बुरा
Sunday, January 28, 2018
आदते नस्ल बता देती हैं
एक बादशाह के दरबार मे एक अजनबी नौकरी की तलब के लिए हाज़िर हुआ ।
क़ाबलियत पूछी गई,
कहा, "सियासी हूँ ।" ( अरबी में सियासी अक्ल ओ तदब्बुर से मसला हल करने वाले मामला फ़हम को कहते हैं ।)
बादशाह के पास सियासतदानों की भरमार थी,
उसे खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना लिया।
चंद दिनों बाद बादशाह ने उस से अपने सब से महंगे और अज़ीज़ घोड़े के मुताल्लिक़ पूछा,
उसने कहा, "नस्ली नही हैं ।"
बादशाह को ताज्जुब हुआ,
उसने जंगल से साईस को बुला कर दरियाफ्त किया..
उसने बताया,
घोड़ा नस्ली हैं, लेकिन इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है।
बादशाह ने अपने मसूल को बुलाया
और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं ?"
उसने कहा
"जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता हैं ।"
बादशाह उसकी फरासत से बहुत मुतास्सिर हुआ, उसने मसूल के घर अनाज ,घी, भुने दुंबे, और परिंदों का आला गोश्त बतौर इनाम भिजवाया।
और उसे मलिका के महल में तैनात कर दिया।
चंद दिनो बाद ,
बादशाह ने उस से बेगम के बारे में राय मांगी,
उसने कहा, "तौर तरीके तो मलिका जैसे हैं लेकिन शहज़ादी नहीं हैं ।"
बादशाह के पैरों तले जमीन निकल गई, हवास दुरुस्त हुए तो अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया,
सास ने कहा
"हक़ीक़त ये हैं, कि आपके वालिद ने मेरे खाविंद से हमारी बेटी की पैदायश पर ही रिश्ता मांग लिया था,
लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपकी बादशाहत से करीबी ताल्लुक़ात क़ायम करने के लिए किसी और कि बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।"
बादशाह ने अपने मुसाहिब से पूछा
"तुम को कैसे इल्म हुआ ?"
उसने कहा,
"उसका खादिमों के साथ सुलूक जाहिलों से भी बदतर हैं । एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक मुलाहजा एक अदब होता हैं, जो शहजादी में बिल्कुल नहीं । "
बादशाह फिर उसकी फरासत से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे मुतय्यन कर दिया।
कुछ वक्त गुज़रा,
मुसाहिब को बुलाया,
अपने बारे में दरियाफ्त किया ।
मुसाहिब ने कहा "जान की अमान ।"
बादशाह ने वादा किया ।
उसने कहा, "न तो आप बादशाह ज़ादे हो न आपका चलन बादशाहों वाला है।"
बादशाह को ताव आया,
मगर जान की अमान दे चुका था,
सीधा अपनी वालिदा के महल पहुंचा ।
वालिदा ने कहा,
"ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे लेकर हम ने पाला ।"
बादशाह ने मुसाहिब को बुलाया और पूछा , बता, "तुझे कैसे इल्म हुआ ????"
उसने कहा
"बादशाह जब किसी को "इनाम ओ इकराम" दिया करते हैं, तो हीरे मोती जवाहरात की शक्ल में देते हैं....
लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें इनायत करते हैं...
ये असलूब बादशाह ज़ादे का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।"
( एक अरबी कहानी से मंक़ूल )
किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी मुल्लम्मा हैं ।
इंसान की असलियत, उस के खून की किस्म उसके व्यवहार, उसकी नियत से होती हैं ।
एक इंसान बहुत आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक और राजनैतिक रूप से बहुत शक्तिशाली होने के उपरांत भी
अगर वह छोटी छोटी चीजों के लिए नियत खराब कर लेता हैं, इंसाफ और सच की कदर नहीं करता,
अपने पर उपकार और विश्वास करने वालों के साथ दगाबाजी कर देता हैं,
या अपने तुच्छ फायदे और स्वार्थ पूर्ति के लिए दूसरे इंसान को बड़ा नुकसान पहुंचाने की लिए तैयार हो जाता हैं,
तो समझ लीजिए,
पीतल पर चढ़ा हुआ सोने का मुलम्मा हैं ।
👍👌
Saturday, January 27, 2018
कासगंज। मुजरिम कौन।
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर यूपी के कासगंज शहर में जो भी कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। गलती किसकी है और कुसूरवार कौन है यह हम सबको मालूम है लेकिन इस दंगे का दंश बेकुसूर आम जनता झेल रही है। कासगंज सहित पड़ोसी जनपदों में हर पल एक नई अफवाह जन्म ले रही है जो दहशत फैलाने के लिए काफी है। कासगंज जिला तो इस समय दहशत के दलदल में फंसा हुआ है।
2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम और यूपी में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही यूपी का मुसलमान अपना हर कदम फूंक फूंककर रख रहा है। पता नही कब उस पर क्या इल्जाम लग जाये। कासगंज में घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना को सोशल मीडिया पर जिस तरह दर्शाया जा रहा है उसकी हकीकत भी जानना उतना ही जरूरी है जैसे खाना खाने के बाद पानी पीना?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं पोस्ट मुसलमानों को ही सरासर दोषी ठहरा रही हैं, लेकिन हकीकत वायरल सच से बिल्कुल विपरीत है। आपको टीवी या सोशल मीडिया के जरिये जानकारी मिली होगी कि कासगंज में तिरंगा यात्रा पर मुसलमानों ने पथराव कर दिया और फायरिंग कर दी। जिसमें अभिषेक गुप्ता उर्फ चंदन की मौत हो गई। आगजनी, तोड़फोड़ और मारपीट की घटनाएं घटीं। हिंसा के दूसरे दिन शनिवार 27 जनवरी को भी आगजनी तोड़फोड़ की घटनाएं घटित हुईं। दहशत और अफवाहों के चलते जिलेभर के बाजार बंद रहे, लेकिन आपको इस सच्चाई से किसी ने रूबरू नही कराया होगा कि तिरंगा यात्रा के दौरान विवाद शुरू कैसे हुआ। तो आइए जानते हैं वो सच्चाई जो मीडिया या सोशल मीडिया के वॉयरस आपको नही बताएंगे?
गणतंत्र दिवस के मौके पर एक समुदाय के युवाओं ने तिरंगा बाइक रैली का आयोजन सुनिश्चित किया। जिसके तहत तिरंगा वाहन रैली निकाली गई। बाइक सवार किसी युवा के हाथ में तिरंगा था तो किसी के हाथ में भगवा झंडा। वंदेमातरम, भारत माता की जय के जयकारों को गुंजायमान करते हुए तिरंगा-भगवा वाहन रैली मुस्लिम बाहुल्य इलाके बड़डू नगर पहुंची। जहां तिरंगा वाहन रैली के पहियों की रफ्तार कम हो गई और जयकारों के स्वर ऊंचे हो गए और जयकारे भी बदल गए। मुस्लिम इलाके में मुस्लिमों को उकसाने के लिए जयकारे थे हिंदुस्तान हिंदुओं का है, भारत में रहना है तो जय श्री राम कहना है, मुल्लों का एक ही स्थान पाकिस्तान या कब्रिस्तान? जब इस नारेबाजी का किसी ने विरोध नही किया तो वह वीर अब्दुल हमीद चौराहे पर तिरंगा और भगवा झंडा फहराने लगे। वहां मौजूद एक मुस्लिम युवक ने भगवा झंडा फहराने का विरोध किया तो उसके कपड़े खींचकर उसको थप्पड़ जड़ दिया। इसी को लेकर विवाद शुरू हुआ और कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। तिरंगा यात्रा निकाल रहे विहिप, ABVP, बजरंग दल, हिन्दू वाहिनी के कार्यकर्ता अपनी बाइकें छोड़कर जान बचाकर भाग निकले। कुछ देर बाद दोनों समुदाय आमने सामने आ गए और पथराव फायरिंग होने लगी। जिसमें अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई और नौशाद गोली लगने से घायल हो गया। इसके बाद दोनों समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए।
सड़कों पर उतरे उपद्रवी तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने लगे। पुलिस ने उपद्रवियों से सख्ती से निपटना शुरू कर दिया और कर्फ्यू की घोषणा कर दी। प्रशासन को लगा कि अब हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नही हुआ। कुछ उपद्रवियों ने झंडा चौक स्थित एक मस्जिद को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद शुक्रवार की देर रात पीलीभीत से आगरा जा रहे कार सवार अकरम कुरैशी की कार रूकवाकर अकरम कुरैशी और उसके परिवार के साथ मारपीट की। इस घटना में अकरम कुरैशी गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसका जेएन मेडिकल कालेज अलीगढ़ में उपचार जारी है। इस सबसे अहम यह है कि इस घटना के बाद से तौफीक और मोहम्मद अच्छन लापता हैं।
उम्मीद थी कि शनिवार की सुबह होते ही हालात कुछ सामान्य हो जाएंगे, लेकिन हालात सामान्य होने के बजाय और बिगड़ गए। शनिवार को चंदन गुप्ता के अंतिम संस्कार के दौरान बीजेपी सांसद राजवीर सिंह राजू भैया ने बारहद्वारी पर आक्रोशित लोगों का गुस्सा शांत करने के बजाय उनके जख्मों पर नमक रगड़ दिया। इसके बाद आगजनी की घटनाएं शुरू हो गईं और उपद्रवियों ने चार दुकानों, एक घर सहित आधा दर्जन वाहनों को आग के हवाले कर दिया। शनिवार की देर रात तक उपद्रवी हाथ में पेट्रोल की बोतलें और पत्थर लेकर घूमते रहे।
अब सवाल यह है कि कासगंज में मचे इस कोहराम का गुनाहगार कौन है। यह हम सब जानते हैं और इल्जाम किसके सिर पर आएगा यह भी हमको पता है लेकिन इस दंगे का दंश बेगुनाह आम जनता को झेलना पड़ रहा है। जिसका कोई कुसूर नही है। लोग दहशत में है पता नही कब क्या हो जाये। कहने के लिए तो हालात सामान्य हैं लेकिन हिंसक घटनाओं से साफ जाहिर है कि अभी कासगंज में सब कुछ ठीक नही है।
Saturday, January 20, 2018
क्या होगा जब सनी लिओने आएगी तुसाद म्यूजियम...!
जब से यह तय हुआ कि दिल्ली के तुसाद म्यूजियम में सनी लिओने का पुतला लगाया जायेगा और जैसे ही यह खबर तुसाद मुजियम में पहले से लगे पुतलों को में एक सनसनी सी फ़ैल गई! म्यूजियम का तापमान अचानक से बढ़ने लगा और उसमे लगे पुतले धीरे धीरे पिघलने लगे! म्यूजियम के करता धर्ताओ में हडकंप मच गया उन्होंने तुरंत म्यूजियम का तापमान - २० डिग्री कर दिया ताकि पुतले पिघलकर बह न जाए! बड़ी मुश्किलों से पुतलों का पिघलना रोका गया! फिर एक आपात बैठक तुरंत बुलाई गई और एक गंभीर चर्चा इस बात पर छिड़ी की जब सनी लिओने के पुतला लगने की खबर मात्र से म्यूजियम का तापमान इतना बढ़ गया की म्यूजियम का तापमान -२० डीग्री करना पड़ा, जब पुतला बाकई में लगाया जाएगा तब क्या होगा! खैर फाइनली यह तय हुआ की हो सकता है तब तापमान और कम करना पड सकता है! इधर जैसे ही यह ख़बर महेश भट्ट साहब को लगी उन्होंने म्यूजियम वाले से सांठ गांठ कर अपना पुतला लगवाने के लिए जुगाड़ बिठा लिया और यह भी तय कर लिया की सनी लिओने का पुतला भी उन्ही के पुतले की बगल में लगाया जाए! खैर सांठ गाँठ से इस देश में सभी कुछ संभव है! अब म्यूजियम वाले जैसे तैसे सनी लिओने जी का पुतला बनाने की तईयारी में जुट लिए लेकिन लाख कोशिशो के बाद भी पुतला स्टेबल नही किया जा सका क्यूंकि मोम पिघलकर बहा जा रहा था! सिमिति में यह आम राय भी बनी की हो सकता है की मोम की क्वालिटी में कुछ खामी हो, लेकिन कई सप्लायर से उच्च क्वालिटी का मोम प्राप्त करने के बाबजूद भी सनी लिओने का पुतला स्टेबल नही किया जा सका! बाद में सर्व सम्मति से यह राय बनी की क्यूँ न इस परेशानी की बजह सनी लिओने से ही पूछी जाये! तत्पश्चात इस समस्या के समाधान के लिए बिग बॉस से संपर्क साधा गया उन्होंने सिमिति की बात पर गौर करते हुए यह निर्णय लिया की यह ठीक रहेगा और कोई ५ सदस्य सनी लिओने से मिलने के लिए अपोइन्टमेंट फिक्स्ड करे! उन सदस्यों को गए महीनो बीत गये तुसाद म्यूजियम आज भी उनके लौटने का इंतजार कर रहा है!